बिहार विधानसभा में निजी बस संचालकों की मनमानी पर हंगामा, सरकार ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

Ruckus in Bihar Assembly over arbitrariness of private bus operators, government assures action

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में निजी बस संचालकों की कथित मनमानी का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। भाजपा विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए आरोप लगाया कि कई जिलों में प्राइवेट बसें सरकारी बस स्टैंड के बाहर ही खड़ी होकर यात्रियों को बैठा लेती हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इस वजह से बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की बसों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विधायक के अनुसार, निजी बस संचालक निर्धारित शुल्क देने और बस स्टैंड के भीतर प्रवेश करने से बचते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और सरकारी बसों की सवारियां कम हो जाती हैं।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर निजी बसों के चालक और स्टाफ सरकारी बस चालकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, जिससे विवाद की स्थिति बनती है।

सदन में गरमाया माहौल
मामला उठते ही सदन में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने इस पर अपनी-अपनी राय रखी। कुछ विधायकों ने परिवहन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार का जवाब
इस पर परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निजी बस संचालकों की गतिविधियों की जांच करें और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां भी सरकारी बस स्टैंड के बाहर अवैध रूप से बसें खड़ी की जा रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। विभाग समय-समय पर औचक निरीक्षण अभियान चलाता है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी।

सदन में मंत्री के आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया, लेकिन यह साफ है कि राज्य में परिवहन व्यवस्था को लेकर सरकार पर निगरानी और सख्ती बढ़ाने का दबाव बना हुआ है। अब नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

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